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‘तेरे आने की जब.....’

Posted On: 8 Feb, 2014 Others में

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‘तेरे आने कि जब…..’
“कुछ न किसी से बोलेंगे, तन्हाई में रो लेंगे…….’’ लैपटॉप पर गुलाम अली साहब की ये ग़ज़ल मद्ध्यम स्वर में बज रहा था | मैं टेबल पर पैर रखकर, सही के निशान की तरह कुर्सी में पसरा हुआ था | फ़राज़ साहब के लफ्ज़ मेरे जख्मों का मरहम कर रहे थे, “हम बे-राह-रवों का क्या…. साथ किसी के हो लेंगे…. ख़ुद तो हुये रुस्वा लेकिन तेरे भेद न खोलेंगे…..’’ | वक़्त कमरे में ठहरा हुआ था, मन अतीत के पन्नो को आंखों के सामने फड़फड़ा रहा था….|
चाय कब की समाप्त हो चुकी थी, लेकिन कप अभी तक मेरे पेट पर रखा हुआ था, मुझमे इतनी हिम्मत नहीं थी कि सीधा हो कर कप टेबल पर रख दूं…| मैं साँसों की आवा-जाही से ऊपर-नीचे होते कप को देखने लगा, कप की जगह एक चेहरा उभर कर बार-बार आंखों के सामने आने लगा, मैंने कप पर से नज़रे हटा ली |
-ये कुछ ज्यादा ही हो रहा है, ये इश्क नहीं बहशत है | मैंने खुद से कहा |
पिछले डेढ़ घंटे से, लैपटॉप में एक ही ग़ज़ल बार-बार प्ले हो रहा था…. कोई दस बार से ज्यादा मैं इस ग़ज़ल को सुन चूका था | अब मुझे ग़ज़ल के सारे शेर याद हो गए थे…. ‘नींद तो क्या आएगी फ़राज़, मौत आएगी तो सो लेंगे, जीवन विष से भरा सागर है, कब तक अमृत घोलेंगे….कुछ न किसी से बोलेगे….’ | कमरे की light ऑफ थी, लेकिन लैपटॉप की रौशनी से थोड़ी बहुत प्रकाश कमरे में फैली हुई थी |
टेबल पर लैपटॉप के अलावा एक सिगरेट का डब्बा, लाइटर, एक कलम, एक सुप्राडिन का पत्ता, दो मोबाइल फ़ोन, चवनप्राश का डब्बा, दो तीन बासी अखबार, और 2010 की एक पुरानी डायरी पड़ी हुई थी | पंखे की हवा में अखबार के पन्ने फड़फड़ा रहे थे |
मोबाइल को मैंने साइलेंट कर दिया था, लेकिन वाइब्रेशन मोड में होने की वजह से, जब भी किसी का कॉल आता तो टेबल घनघनाने लगता था…..|
पिछले पंद्रह मिनट से कोई लगातार कॉल किए जा रहा था… । घन-घन…. घान्न्न्नन्न….. सुन-सुन कर इरिटेट हो रहा था ..
‘कौन बदतमीज है जो इतनी कॉल किए जा रहा है..?’, मैं अपने आप में बुदबुदाया… but who cares..? मोबाइल बजे ही जा रहा था…., बजे ही जा रहा था…. अब और नहीं झेल सकता था, -साला है कौन ये…?
मैंने पेट पर रखे कप को उठाया, पैर टेबल से नीचे किया और कप को टेबल पर रखा और मोबाइल उठा कर देखा, ‘Sapna calling….’, ‘तुम……!!! बच्ची, I will teach you a lesson, this time…!!! समझती क्या है ये मुझको, पागल लड़की…’, मोबाइल को देखते हुए मैं जोर से बोला | मेरी आवाज़ गुलाम अली साहब की आवाज़ से टकरा कर फर्श पर बिखर गई….

फ़ोन थोड़ी देर घनघाना कर शांत हो गया | 33 missed calls… ‘पागल है क्या ये लड़की, जब नहीं करनी है मुझे बात, तो क्यों कॉल किए जा रही है’, मैंने घर की दीवारों से कहा, but again who gives a fuck…?? मोबाइल फिर से घनघनाया ..घननन..न्नन्न….. इस बार call नहीं मेसेज था whtsapp पर..| मैंने मेसेज खोला, ‘Sapna 4’, चार मेसेज आए थे | ‘Don’t you want to talk to me..??’, ‘I am missing you so much.’ ‘Are you fine…??’ ‘stupid baat kar lo, kab se call kar rahi hoon…!’
मैंने मेसेज देख कर मोबाइल फिर से टेबल पर रख दिया, – ‘बेटा करती रहो तुम ज़िन्दगी भर कॉल और मेसेज, I won’t talk to you..समझी तुम..स्टुपिड’, मैंने मुंह लटकाए मोबाइल को डांटते हुए कहा, मोबाइल भी किसी आज्ञाकारी क्षात्र की तरह चुप करके मेरी डांट सुन लिया |
मन के अंदर द्वन्द चलने लगा, ‘ बहुत नाटक हैं इसके….I won’t talk…. दो दिन से कहां मरी हुई थी…? कोई दो सौ कॉल और पचास मेसेज किए होंगे, but no response…’, मैंने ख़ुद से बाते कर रहा था |
मैंने मोबाइल को हिकारत भरी निगाह से देखा, और उठ कर लाइट ऑन किया, और सिगरेट का डब्बा खोल कर देखा, डब्बा खाली था…शेर के घर में मांस का मिलना ‘इम्पॉसिबल’…..!! मैंने डब्बा उठा कर खिड़की के बहार फेक दिया |
सिगरेट का डब्बा फेकने के बाद, हाथ बरबस टेबल पर रखी डायरी की ओर बढ़ा, लेकिन डायरी को छू कर मैंने हाथ पीछे खीच लिया….’no more emotional trip..’, मैंने ख़ुद को समझाते हुए कहा | चेयर को पीछे की ओर धक्का दिया, और फिर उस पर बैठ गया । ग़ज़ल बजना बंद हो गया था और लैपटॉप sleeping मोड में चला गया था । मैंने स्पेस-बार को दो तीन बार दबाया….., नाराज़ माशूका की तरह लैपटॉप ने कोई जवाब नहीं दिया…
–लगता है ऑफ हो गया है..!! लेकिन उठ कर चार्जर वाला स्विच ऑन करने का मन नहीं हुआ….| मोबाइल अब भी ‘घनघाना’ रहा था | थोड़ी देर यूं ही बैठा रहा, फिर डायरी उठा कर उसके पन्ने पलटने लगा | एक पन्ने पर मेरी नज़र ठहर गई, 25 july, 2010. मैंने एक लाइन पढ़ कर डायरी बंद कर के रख दिया | मन कहीं ठहर नहीं रहा था…., ‘नहीं करनी है मुझे इससे बात, समझती क्यों नहीं है ये…??
सिगरेट की सख्त ज़रुरत महसूस होने लगी | टेबल पर से एक मोबाइल उठा कर जेब मे रखा और रूम बंद कर के मैं नीचे गली में आ गया |
रहमत मियां की छोटी वाली बेटी साहिरा दूकान पर बैठी थी, दिखने में सांवली और दुबली-पतली है, लेकिन उसके चेहरे पर एक ख़ास किस्म की चमक है, जो अक्सर संवली लड़की में ही होती है | नाक़ पर सोने का लौंग क्या ख़ूब जंच रही थी उस पर | लाल समीज पर काले रंग का पत्ता छपा हुआ था, उजले दुपट्टे को गमछा की तरह गले में लपेट रखी थी | दूकान में जल रहे ट्यूब लाइट की दुधिया रौशनी में खिली-खिली लग रही थी |
-She is looking fucking beautiful, I said to myself.

मुझे देखते ही हौले से मुस्कुराई, “क्या दूं’’, ‘चार सिगरेट दे दो’, मैंने मुस्कुरा कर उसे देखते हुए कहा | डेविडऑफ के डब्बे से चार सिगरेट निकाल कर उसने मेरी ओर बढ़ा दी | ‘डब्बा नहीं है’, मैंने उसके हाथ से सिगरेट लेते हुए पूछा | छोटी बच्ची की तरह होंठ बिचका कर ना में सिर हिला दी |
सिगरेट जला कर मैंने लैपटॉप को चार्जर से कनेक्ट कर ऑन किया और इस बार फिर से एक ग़ज़ल बजा दिया | “तेरे आने की जब खबर महके, तेरी खुशबू से सारा घर महके…’ जगजीत सिंह की मखमली आवाज़…. आह…लग रहा था जैसे कोई हल्के हाथों से गुदगुदी लगा रहा हो |
सिगरेट आधी जल चुकी थी, ऐश झाड़ने के लिए आस-पास कुछ नहीं दिखा, मैंने चाय के कप में ऐश झाड़ दिया | तभी कमरे में लगी बेल बजी….. ‘कौन हो सकता है इस वक़्त…कहीं माकन मालिक तो नहीं आ गया…?? मैंने जल्दी से सिगरेट बुझाया और जेब में डाल लिया, कप में से ऐश को ऊँगली से निकाल कर उसे भी जेब में डाला…. फिर से बेल की आवाज़….मैंने गाने की आवाज़ बढ़ा दी… बैग से डियो निकाल कर घर में झिड़का और जल्दी से गेट खोलने गया…. ‘अगर उसे सिगरेट की गंध लग गई तो,??? I guess I am fucked now ….’, मैंने मन ही मन बुदबुदाया..| गहरी सांस लेते हुए मैंने, गेट खोला…..,
चेहरे पर फूलों सी मुस्कराहट लिए एक चौबीस-पचीस साल की लड़की, लाल सूट में गेट पर खड़ी थी…, बगल में काले रंग का बैग लटकाए हुए थी, बाल खुले हुए थे, माथे पर लाल बिंदी…., इससे पहले कि मैं और कुछ नोटिस करता, “अंदर बुलाओगे या यहीं खड़े-खड़े घूरते रहोगे?”, मुस्कुराते हुए ऐसे बोली , जैसे मुझे बरसों से जानती हो | मेरे चेहरे पर ख़ुशी और आश्चर्यज का मिला-जुला भाव बनने लगा । ख़ुशी इस बात की कि एक खूबसूरत लड़की मुझसे मिलने आई थी, वो भी शाम के सात बजे, और आश्चर्य ये कि – ये कौन है जो बिना जान-पहचान के मेरे घर में आना चाहती है? ‘माफ़ कीजिएगा मैंने आपको पहचाना नहीं….लगता है आप गलत पते पर आ गई हैं…??’, मैंने बेमन से उससे कहा और वहां से हट जाना चाह | मुझे ऐसा कहते हुए थोड़ा अजीब भी लगा, सोचा कि कहीं इसको बुरा न लग जाए, क्या पता कोई पहचान की निकले….?? लेकिन मैं कोई खतरा मोल नहीं ले सकता था । मेरे ख़ुफ़िया दिमाग में तरह-तरह के ख्याल आने लगे….मैंने बचपन में बहुत से जासूसी उपन्यास पढ़ रखा था |
“इडियट, जरा मोटी क्या हो गई, तुम मुझे पहचानने से ही इनकार कर रहे हो, मैं अनामिका हूँ”, वो शिकायत करते हुए मुझसे बोली | ‘अनामिका’ मैंने दिमाग पर बहुत जोर डाला, लेकिन कोई अनामिका याद नहीं आई | -Who the fuck are you..?, बिना बोले मैंने उससे पूछा । जहाँ तक मुझे याद आ रहा था, मेरी पूरी ज़िन्दगी में कभी किसी अनामिका से मेरा वास्ता नहीं रहा था | मेरे रिश्तेदार में भी किसी का नाम अनामिका नहीं था, हाँ मेरी माँ कभी-कभी कहती है, “मैं अपनी बहु को अनामिका कह कर बुलाऊंगी, ये नाम मुझे प्यारा लगता है” | ‘मैं फिर से माफ़ी चाहूँगा, मैं अब भी आपको नहीं पहचाना….’, मेरे चेहरे पर बेबसी का भाव उभर आया, ऐसा लगा ये कहते हुए मैं कोई अपराध कर रहा हूँ-एक खूबसूरत लड़की से ये कहना कि मैं तुम्हे पहचनता नहीं हूँ किसी बड़े पाप से कम है क्या…? |“देखो, मैं तुम्हारी नाराज़गी समझती हूँ, तुम्हारा ऐसा रियेक्ट करना स्वभाविक है, लेकिन मैं सोची, शायद तुम मुझे अब भी प्यार करते हो और याद करते हो, फेसबुक पर तुम्हारी कहानी पढ़ी, “उंगलियाँ आज भी…” मैं नही सोचती थी कि तुम मुझसे इतना प्यार करते हो, It was so touching, कहानी पढने के बाद मुझसे रहा नहीं गया, मैं तुमसे मिलने के लिए तड़प उठी, कितनी मुश्किल से मैंने तुम्हारा पता ढूंढा…., सोची इतने सालों बाद मुझे यूं अचानक देख कर, तुम ख़ुशी और आश्चर्य से चहक उठोगे…लेकिन तुम…. लगता है तुमने अभी तक मुझे माफ़ नहीं किया है…” वो एक ही सांस में पूरी बात गंभीरता से बोल गई….उसका चेहरा एकदम से मुरझाए फूल की तरह हो गया था | मैंने ख़ुद को झकझोर कर देखा -कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा हूँ, ये क्या हो रहा है मेरे साथ, उसकी बात सुनकर मेरा सर चकराने लगा | अभी मैंने चार दिन पहले ‘उंगलियाँ आज भी…’ नाम से एक कहानी लिखा तो था | उस कहानी की नायिका अनामिका थी, लेकिन वो तो बस कहानी थी | मैं किसी अनामिका को नहीं जनता था, न ही मैं कभी इस लड़की से मिला था और न ही कहीं देखा था | ‘मैं…..मैं’, मैंने कुछ बोलना चाह, लेकिन वो अब मुझसे और बहस करने के मूड में नहीं थी | मुझे धक्का देते हुए अंदर घुस गई |
‘Man, lots of shit is happening here’, I told myself.

‘तेरे आने की जब ख़बर महके, तेरी खुशबू से सारा घर महके….’, लैपटॉप पर तेज़ आवाज़ में बज रहा था |She got welcomed by this song. मुझे ऐसा लगा शायद उसकी के लिए मैंने ये गाना प्ले कर के रखा था |मैं इतना हैरान और परेशान अपनी पूरी ज़िन्दगी में कभी नहीं हुआ था….| -What the fuck is happening here..?? ‘कहीं ये कोई भूत-ऊत तो नहीं है…?’, मेरे अंदर ये बेहूदा ख्याल आया | ‘नहीं…नहीं…भूत-प्रेत थोड़े न होते हैं’, मैंने ख़ुद समझाया और सिर झटक कर इस ख्याल को मन से निकाल दिया |
-लेकिन ये क्या मजाक घट रहा है मेरे साथ, हज़ार सवाल उठ रहे थे अंदर, लेकिन जवाब देने वाला कोई नहीं था | – आज डेट क्या है…? मेरे अंदर से सवाल उठा…| -13 फरवरी…, the answer came…!! आज मुर्ख दिवस भी नहीं है, फिर ये सब क्या है???
अंदर घुसने के बाद उसने ख़ुद से फैन ऑन कर लिया, और लैपटॉप में बज रहे गाने को बंद करते हुए मुझे बोली, “तुम अब भी ग़ज़ल-पज़ल ही सुनते हो ?’, -अब भी…??? अब भी से क्या मतलब है इसका..??? ‘अब भी से क्या मतलब है तुम्हारा…?’, मैंने एक-एक शब्द पर जोर देते हुए पूछा | She was not interested in my question. टेबल पर पड़े सिगरेट को देख कर मुझे डांटे हुए बोली, “तो तुम अब ये सब भी करने लगे हो, दारु भी पीते हो…??’’, उसका लहजा और अंदाज़ बिल्कुल मेरी माँ की तरह था… माँ ने भी जब पहली बार मुझे सिगरेट पीते हुए पकड़ा था, तो ठीक यही बात मुझसे कही थी, उनका अंदाज़ भी यही था | ‘कभी-कभी ही पीता हूँ’, मैंने सफाई देते हुए कहा -मैं इसे ये सब क्यों बता रहा हूँ..?? मुझे ख़ुद पर गुस्सा आया, am I a fucking fool..? |
मैंने कभी ज़िन्दगी में ड्रग्स नहीं लिया है, लेकिन उस वक्त मैं दिमाग पे जोर डालने लगा – कहीं मैंने ड्रग्स तो नहीं लिया है… कहीं मैं पागल तो नहीं हो गया हूँ..??? मुझे अंदर से डर लगने लगा, उस लड़की से ज्यादा मुझे ख़ुद से डर लगने लगा था |
अजीब उलझन में फस गया था, न उसे कमरे से निकाल सकता था और न ही मैं उसको इंटरटेन कर सकता | मेरे लिए अब ये जानना बहुत ज़रूरी हो गया था कि ये खूबसूरत बला कौन है…?? “तो तुम अनामिका हो…?”, मैंने गभीर व सख्त लहजे में उससे पूछा | “क्ययययया सनातन, मैं सोची कि तुम मुझे देख कर खुश होओगे, कितनी मुश्किल से मैंने तुम्हारे बारे में पता लगाया, और तुम हो कि नाटक कर रहे हो, मैं कभी नहीं सोची थी कि तुम इस तरह से मिलोगे मुझसे, मेरी ही गलती है, तुम्हारी कहानी पढ़ कर बावरी हो गई थी, जा रही हूँ मैं”, उसके आंखों से मोती की तरह आंसूं टपके लगे, मेरी ओर एक बार नफरत से देखी और उठ कर जाने लगी…|
उसकी आंखों में आंसू देख कर, मुझे खुद पर तेज़ गुस्सा आया- एक तो लड़की ख़ुद चल कर तुम्हारे पास आई है और तुम नाटक कर रहे हो..?? कितने प्यार से, “क्ययययया सनातन” बोली थी, छोटे बच्चों-सी मासूम लग रही थी | She was looking stunning. कुछ पल तक मैं पेड़ कि तरह खड़ा रहा । वो गेट खोल कर जाने लगी, मैं अजीब धर्मसंकट में फसा हुआ था, दिमाग बुल्कुल खाली था – I doubted if I had mind even.
What the fuck is going on here..?, I asked myself, but again who cares..??
मैंने लपक कर उसका हाथ पकड़ लिया, ‘सॉरी, मैं तुमसे नाराज़ था, I am really sorry, I was just acting.’ मुझे ख़ुद समझ नहीं आया कि ऐसा मैंने उसे क्यों कहा, खुद बोल कर खुद अफ़सोस करने लगा – ये क्या अनापसनाप कह रहा हूँ मैं इससे…!! “नहीं, you don’t love me, I was wrong… हाथ छोड़ो मेरा, I am leaving”, मेरी पकड़ से अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली, उसके चेहरे पर शिकायत, गुस्सा, और नाराज़गी तीनो का मिला-जुला भाव स्पष्ट दिख रहा था | “I am extremely sorry, मुझे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ था, मुझे लगा मैं कोई सपना देख रहा हूँ, इसीलिए मैंने ऐसा अजीब सा बिहेव किया… I am so happy to see you, बच्ची”, मैंने almost गिरगिराते हुए कहा |
बिना सच्चाई जाने मैं उसे जाने नहीं देना चाहता था | “मैं जानती थी कि तुम नाटक कर रहे थे, but you hurt me,’’ उसने नाराज़ होते हुए कहा, लेकिन अगले ही पल उसके चेहरे पर बच्चों जैसी स्माइल थी, “lets hug”, कहते हुए बांहे फैला दी, और मुझसे ऐसे चिपट गई जैसे हम सच में कोई बरसों के बाद मिले प्रेमी हों…| न चाहते हुए भी मैंने उसका साथ देने लगा । No, I am telling a lie, मैं चाहता था लेकिन डरा हुआ था। हम दोनों फेविकोल की जोड़ की तरह चिपक गए, शुरू में तो मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था, लेकिन कुछ पल के बाद उससे चिपटना अच्छा लगने लगा |
- नाटक की हद हो गई, ये मैं किस खेल में फसता जा रहा हूँ …?? मेरा दिमाग मुझे सचेत करने में लगा हुआ था |
इससे पहले कि मैं कुछ और सोच पता मेरे नाक के बराबर में अपनी नाक लाते हुए बोली, “Do you still love me, जान…?”, मैं उसकी गर्म सांसों महसूस कर सकता था | “yes baby, I still love you, I never forgot you”, हमारी साँसे टकरा रही थी |
मैं अब उसको अनामिका स्वीकार कर चुका था, मैं मान चूका था कि ये मेरे कहानी की हिरोइन है जो मुझसे मिलने आई है | पता नहीं इस बात को मैंने इतनी आसानी से कैसे स्वीकार कर लिया था, लेकिन और कर भी क्या सकता था मैं…?? | हम दोनों अब भी एक दुसरे के बाँहों की गिरफ्त में थे | मैं आनायास ही अपना एक हाथ उसके पीठ पर फिराने लगा | हम दोनों ने इतना कस कर एक दुसरे को जकड़ा हुआ था कि हवा भी बीच से न गुज़र पाए | मुझे वसी शाह की एक शेर याद आ गई, “इस कदर टूट कर तुम पर मुझे प्यार आता है, अपनी बाहों में भरें मार ही डाले तुमको”

“मैं कब से तुमसे मिलने के लिए तड़प रही थी”, कहते हुए उसने अपने नाक को मेरे नाक से रगड़ने लगी | इससे पहले कि मैं कुछ कहता उसने कोई तीन सेकंड के लिए मेरे उपरी होंठ को अपने होंठों में ले कर चूमा | मैं इसके लिए तैयार नहीं था । It was so अजीब..! मैं एक ऐसी लड़की के बाहों में था , जिसे मैं सिर्फ पिछले 7 मिनट से जान रहा था | सब कुछ इतनी तेज़ी से हो रहा था, कि कुछ समझ नहीं आ रहा था । It was fucking strange…लेकिन I was not very surprised, मैंने इंग्लिश मूवी बहुत देखी है, वहां इससे भी फ़ास्ट होता है सब कुछ |
वो नज़रे उठा कर मेरी आंखों में देखने लगी, मुझे उसकी आंखों में अथाह प्रेम नज़र आ रहा था |Yes, I did see that- the deep love for me. उसे अपनी बाहों की घरों में लेते हुए, मैं ने अपने दाई हाथ की कलाई को बाई हाथ से पकड़ा और उसे अपनी ओर कस कर खीच लिया । एक पल के लिए उसकी आँखों में देखा…. again the deep love…!! मैंने उसके होंठो पर अपना होंठ रख दिया…. At first, I didn’t feel anything, but soon, I was transported into different world. To know the test of a beautiful girl’s lips, you have to kiss a beautiful girl only. इसको जानने का और कोई उपाय नहीं है, frankly speaking, I cannot tell you कि कैसा लग रहा था मुझे, तुलना के लिए मुझे कुछ सूझ नहीं रहा है.
कोई पांच मिनट तक हम दोनों एक दुसरे के साथ सलाइवा का आदान-प्रदान करते रहे, हम दोनों की जीभें देर तक एक दुसरे से बाते की, सुबह से क्या-क्या खाया था सब का स्वाद एक दुसरे को बताया | जब हम दोनों सलाइवा के आदान-प्रदान में व्यस्त थे, दिन दुनिया से बेख़बर, न उसे होश था, न मुझे होश था, “न तुम्हे होश रहे, न मुझे होश रहे, इस क़दर टूट के चाहो कि मुझे पागल कर दो” की तर्ज़ पर हम दोनों एक दुसरे को प्यार कर रहे थे, तब इस माकूल मौके का पूरा फायदा उठाया मेरे दोनों हाथ ने । उन्होंने उसके अंग-अंग को छू कर इस बात की अच्छे से तशल्ली कर ली कि ये लड़की ही है, कोई भूत-प्रेत नहीं |
हृदय को जीवन वायु की पर्याप्त मात्र पहुँचाने के लिए जब हम कुछ पल के लिए अलग हुए, तो वो एक हाथ से मेरे दोनों गालों को दबाते हुए मुझसे पूछी, “कैसी लगी मुंगिया होठों की स्वाद”, और खिलखिला कर हंसने लगी, “ क्या लिखा था तुमने, “It was looking so kissable..hmmmm,..इडियट”, बोलते हुए मेरे को थप्पड़ मारी और मेरे दोनों गालों को पकड़ कर खीचने लगी |
-“ये दुनियां चमत्कारों से भरी है, यहाँ कभी भी कुछ भी हो सकता है”, पता नहीं कहां पढ़ा या सुना था मैंने ये लाइन, उस वक़्त यही लाइन मेरे अंदर घूम रही थी | -क्या कहूँगा मैं लोगों से कि मेरे कहानी की हेरोइन सच्ची में मुझसे मिलने आई थी और मैंने उसे kiss किया…??
जैसे ही उसने मेरा गाल छोड़ा, मैंने अपनी पकड़ ढीली कर दी | वो अब मेरी बांहों के घेरे से आज़ाद थी | ‘सुनो माकन मालिक कभी भी आ सकता है, किराया लेना है उसे आज…’, मैंने उससे अपनी चिंता व्यक्त की, और उसे देखने लगा | उसके चेहरे पर लाली उतर आई थी, कुछ ज्यादा ही मादक और मनमोहक लग रही थी | “मैं क्या….”, वो कुछ बोलने को हुई, लेकिन मैंने उसे फिर से अपने पास खीचा, और उसके चेहरे को अपने हाथों में लेकर निहारने लगा, I know her, I assured myself. उसने खुद को मुझे समर्पित कर दिया था | मेरी उँगलियाँ उसके गालों को सहलाने लगी, they were soooo soft. उसने हाथों का घेरा बना कर मुझे जोर से अपनी ओर खीचा, मेरे निचले होंठ को ऐसे चूसने लगी, जैसे छोटा बचा अंगूठा को मुंह में लेकर चूसता है | मेरे पुरे शरीर में सनसनी फैले गई..हम दोनों एक दुसरे में खो जाने की कोशिश कर रहे थे । शरीर बीच में बाधा बन रहा था । उससे भी ज्यादा उसका दुपट्टा…मैंने उसके दुपट्टे को उसकी गर्दन से उतार कर अपने गले में लपेट लिया। …प्रेम और आनंद की लहरे मेरे पुरे शरीर में हिलोरें ले रही थीं | हम एक बार फिर से एक दुसरे के होंठो को बेहताशा चूम रहे थे, this time we were more passionate. ‘तुम मोटी नहीं अच्छी हो गई हो’, मैंने एक क्षण का ब्रेक लेते हुए कहा | “लेकिन तुम बहुत कमज़ोर हो गए हो, ये सुप्राडिन और चवनप्राश खाने से सेहत नहीं बनेगी, स्टुपिड”, मेरे होंठों को पकड़ कर एंठते हुए बोली |
- इतनी loving और caring कोई फेक लकड़ी कैसे हो सकती है…?? ये सच में अनामिका ही है, मेरे कहानी की अनामिका | मैंने पुरे आत्मविश्वास के साथ अपने mind को समझाया, जो काफी देर से बकवास किए जा रहा था |
मुझे खोया देख बोली, “माकन मालिक सच में आएगा क्या…??’’, मैंने उसके चेहरे को पढ़ना चाहा, कितनी मासूम लग रही थी | ‘हां, आएगा तो ज़रूर’, उससे अलग होते हुए मैंने कहा | “अच्छा, चलो कॉफ़ी पिलाओ मुझे, मैं फ्रेश होकर आती हूँ”, कहते हुए बाथरूम का light ऑन किया और अंदर ऐसे निश्चिंत को कर घुस गई, जैसे कह रही हो, ‘मकान मालिक my foot..! I loved it.
-ये लड़की किसी से नहीं डरती है, कोई आए या जाए, इससे इसको कोई फर्क नहीं पड़ता है | इतनी daring लड़की मैंने आज तक नहीं देखा था | मैंने अपने अंदर के जासूस को समझाते हुए कहा |

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