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उंगलियां आज भी...1

Posted On: 3 Feb, 2014 Others में

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‘शादी’… I hate this word. इस एक शब्द ने पिछले चार साल से मुझे परेशान कर रक्खा है | कल माँ एक घंटे तक लड़ती रही मुझसे…!! आजकल शादी को लेकर माँ से रोज़ लड़ाई होती है… ‘अरे नहीं करनी है मुझे शादी-वादी… कर दो छोटे की…जब मैं खुद कह रहा हूँ की मुझे नहीं करनी है…तो मतलब क्या बनता है सब को मेरे चक्कर में रोक कर रखने का….!!’
I am fed up to the back teeth with this bloody नाटक called शादी.
मैं अपने ख़्वाब में भी नहीं सोच सकता कि मैं किसी ऐसे व्यक्ति के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहा हूँ, जिसे मैं प्रेम नहीं करता हूँ | दूसरी बात, मैं नहीं सोचता कि मैं कभी किसी ऐसे व्यक्ति को अपने साथ रहने की मंजूरी दूंगा, जिसको मुझसे प्रेम नहीं है |
याद है वो दिन….
8 फ़रवरी, 2010, दिन मंगलवार, समय 7:20 संध्या….,
ग्रीन टी-शर्ट मे, मुझसे तीन साल बड़ी एक बेहद खूबसूरत लड़की मेरे सामने बैठी थी | ख़ूबसूरती को दर्शाने के लिए जिन-जिन उपमा व अलंकारों का इस्तेमाल किया जाता है, उन सब का इस्तेमाल कर के भी, मैं नहीं बता सकता हूँ कि वो कितनी खूबसूरत थी। she was just out of the world.. a beggar’s description. उसको देख कर मैं अक्सर सोचा करता कि स्वर्ग में भी कोई माइकल एंजेलो ज़रूर होगा, जो कभी-कभी अपनी उत्कृष्ट कृति को ज़मीन पर भेजता है|
टी-शर्ट के ऊपर उसने एक काले रंग का half जैकेट पहन रक्खा था | नीचे चूड़ीदार जीन्स और स्पोर्ट्स शूज़ पहने हुई थी। चेहरे पर नाम मात्र मेकअप, बिना लिपस्टिक पुता मुंगिया होंठ-it was looking so kissable. कान में टी-शर्ट की कलर से मेच करता हुआ बाली झूल रहा था। She was looking just soooooo cute…!! जब सीढ़ी उतर के अंदर बेसमेंट में आ रही थी, तो काले रंग का चश्मा लगा रखा था, लेकिन आते के साथ ही उसने चश्मा उतार कर टेबल पर रख दिया…. as if she knew that I just love to look deep into her eyes…, पर्स को लापरवाही से सोफे पर पटक दिया और फिर मेरे सामने वाली चेयर पर बैठ कर बच्चों की तरह झूलने लगी,….. Now, she was at home, she would often say, “I feel so comfortable with you”. अगर कोई और होता तो मैं इस तरह उसे कुर्सी पर झूलने नहीं देता….मेरी दो कुर्सी को लोगों ने इसी तरह झूला बना कर तोड़ दिया था… लेकिन अभी इसका यूं झूलना मुझे अच्छा लग रहा था ।
यहाँ बता दूं कि मेरा इंस्टीट्यूट बिल्डिंग के नीचे बेसमेंट में था | सो अंदर आने के लिए सीढियों से उतर कर नीचे आना पड़ता था | बेसमेंट में इंस्टीट्यूट चलाने के कई फायदे थे, एक तो नीचे गर्मी कम होती थी, दूसरा रेंट कम देना पड़ता था | और इंस्टीट्यूट के लिहाज़ से एक और बात अच्छी थी, सड़क का शोर नीचे कम आता था | स्टूडेंट्स अक्सर गर्मी के दिनों में क्लास न होने पर भी नीचे आ कर बैठे रहते थे |
“दाढ़ी क्यों कटा लिया तुमने…, अच्छे नहीं लगते हो बिना दाढ़ी के?” मुझे देख कर मुंह बनाते हुए पूछी |
‘यूं ही कटा लिया, जल्दी ही आ जाएंगे’। मैंने सफाई देते हुए कहा…पता नहीं मैंने सफाई क्यूँ दिया । मेरी दाढ़ी है कटाऊँ या रखूं ।
वैसे ऐसा नहीं है कि मैं बिना दाढ़ी के ख़राब लगता हूँ। असल बात ये थी कि बिना दाढ़ी के मैं उससे छोटा दिखने लगता था । और ये बात मोहतरमा को पसंद नहीं थी । She was very political, जो भी बोलना होता था, घुमा-फिरा के बोलती थी। अगर बनारस के बारे में कोई बात करनी हो, तो लंका से शुरू करेगी, फिर लंका लांघ के बनारस आएगी । दूसरी मुलाकात में ही मैंने उससे कहा था, ‘You are a political प्राणी. I actually hated her sometimes फॉर her जलेबी-talk.’
कुछ देर तक निहारने के बाद मैंने पूछा।
‘चाय लोगी?’
“हाँ, बोल दो…” पुरे अधिकार के साथ मुझसे बोली |
मैं उठ कर सीधे बहार निकल गया | मुझे चाय पीने की आदत नहीं थी, लेकिन ये जब भी आती थी मैं इसके साथ चाय पी लेता था | बेसमेंट से बहार निकते ही चाय वाले का दुकान था, चाय वाला थोड़ा अकडू था, लेकिन चाय अच्छी बनता था,| मैं उस वक़्त अच्छी और बुरी चाय में फ़र्क करना नहीं जनता था ..ये इस लड़की का ही कहना था कि वो चाय अच्छी बनाता है | मेरे लिए चाय मतलब जीभ जलाना और पेट खराब करना… जब भी चाय पीता था या तो जीभ जल जाती थी, या फिर पेट ख़राब हो जाता था | इससे मिलने से पहले मैं ये भी मानता था कि चाय पीने से होंठ काले हो जाते हैं… लेकिन इसके मूंगिया होंठो को देखने के बाद, इस बात में अब कोई सच्चाई नहीं रह गई थी, अब तो मैं ये मानने लगा था कि चाय पीने से होंठ लाल होते हैं।
मुझे व्यक्तिगत तौर पर चाय वाले से कोई शिकायत नहीं थी, मेरे लिए वो बहुत अच्छा था | कभी अगर मैं नहीं होता इंस्टीट्यूट में, और कोई मुझसे मिलने आया होता था, तो चाय वाला उसे अपने यहाँ बिठा के रखता था। और अगर मैं देर से आने वाला होता था, तो उसे मेरे आने जाने का समय बता कर भेज देता था । लेकिन मेरे कुछ स्टूडेंट्स को उससे शिकायत रहती थी | शिकायत इसलिए रहती थी कि वो time-to-टाइम पैसों की तगादा कर देता था, और ये लोग चाय तो पी लेते थे लेकिन पैसा देने के टाइम पर ‘वो देगा तो वो देगा’ होने लगता था ।
‘भैया दो कप चाय नीचे भेज देना’, मैंने बहार निकल कर बेसमेंट के गेट से ही उसे आवज़ देते हुआ कहा |
“ठीक है, सर जी…अभी भेजता हूँ” चाय वाले ने बिना मेरी ओर देखे जवाब दिया।
पता नहीं क्यों मैं सब को ‘भैया’ कह कर ही क्यों संबोधित कहता हूँ, वो चाय वाला कम-अज-कम बीस साल बड़ा होगा मुझसे, इनता न भी हो, लेकिन गंजा होने के कारण ऐसा दिखता ज़रूर था | चाय के लिए बोलने के बाद, मैं वाशरूम में गया और लाइट जला कर ख़ुद को आईने में देखा, पीले जैकेट में अच्छा दिख रहा था… बाल ठीक करके नीचे आ गया.. |
बैठते के साथ ही मैंने कहा, ‘so….’
“so”, उसने भी यही कहा | ये so-so करना हमारा फेवरिट टाइम-पास था | एक बार मैं ‘so’ बोलता था, तो एक बार वो |
“अब बोलो भी… क्या बात करनी हैं, क्यों बुलाया है मुझे?”
‘मूड कैसा है तुम्हारा..? अगर अच्छे मूड में हो तभी बात करूँगा मैं…’
“मूड ठीक है, कल जब तुमने मुझे कॉल किया था, तो मैं अपने सास के अंतिम संस्कार से वापिस आ रही थी। काफ़ी लेट हो गया था, नहीं तो कल ही आ जाती… just घर पहुंची थी… माँ बोलती अभी इतनी रात को कहाँ जा रही हो… And you know my mom…वो नहीं चाहती हैं कि मैं तुमसे मिलूं”
मेरा ध्यान उस के पहले व्याक्य पर ही अटक गया था…. मैंने ध्यान नहीं दिया कि आगे और क्या-क्या बोली ।
वैसे उसकी माँ… Leave it; I don’t want to talk about “the nice lady”. “She is a nice lady, है न?” हुंह…. हमारी कई बार लड़ाई हो चुकी थी इस “है न?” को ले कर, but still “she was a nice lady”. I just hated the way her mother would look at me. “तुम्हारा वो दोस्त मुझे नमस्ते नहीं करता है’’, this is what she would tell to अनामिका… ओह… yes….!! उसका नाम अनामिका था…my love अनामिका…!!!
‘ओह… So sad..! (मुझे बाद में फील हुआ कि यहाँ मुझे ’so sad’ के बदले ‘I am so happy’ कहना चाहिए था) क्या हो रहा था उनको, I mean कैसे…death…?’ , मैंने अफ़सोस व्यक्त करते हुए कहा |
ये पूछ कर मैं दिमाग दौड़ाने लगा – who is her सास…??? कहीं अपने बहन की सास को तो सास नहीं बोल रही है…।
मेरा ऐसा सोचना लाज़मी था, क्योंकि जो लड़की अपने भतीजे-भतीजी को अपना बेटा-बेटी बुलाती थी, वो बहन की सास को सास भी कह सकती थी । उसकी बहन जयपुर में ही रहती थी | लेकिन यहाँ मामला कुछ और था। यहाँ वो अपने ख़ुद के सास की ही बात कर रही थी |
“कुछ नहीं, काफ़ी दिनों से बीमार रह रही थीं, वैसे उम्र भी हो गई थी, She was 75 years old. सुमित बहुत दुखी है।”
‘सुमिततत्तत’- Oh my gosh..!! She is calling her boyfriend’s mother सास…!!
‘ह्म्म्म……’ मेरे अंदर से बस इतना ही निकला। तभी एक ख्याल मन में आया- अगर इसकी सास, 75 की थीं, तो इसके would-be husband की उम्र क्या होगी अभी…??? मुझसे तो काफ़ी बड़ा होगा…. इससे भी बड़ा होगा… क्या इनका रिलेशनशिप इस मुकाम पर आ पहुंचा है कि अब ये अपने बॉयफ्रेंड की माँ को सास बोल रही है…?? कहीं मुझे उकसाने के लिए तो नहीं बोल रही है ये सब….!! अब मेरा सर घूम रहा था, एक आदमी के अंदर दिन भर में 60 हज़ार विचार बनते हैं, लेकिन उस क्षण एक साथ 60 हज़ार विचार मेरे अंदर घूम रहे थे | मेरे चेहरे का रंग उतर गया था..। सोचने लगा- ये संस्कार में क्यों गई थी..? ।

सुमित से मैं मिला नहीं था कभी लेकिन दो बार उससे मेरी फ़ोन पर बात हुई थी ।
17-सितम्बर-2009…दोपहर का वक़्त था। मैं इंस्टिट्यूट में पड़े सोफे पर लेटा था और अपने एक स्टूडेंट संतोष से बात कर रहा था। संतोष मुझसे गणित पढ़ने आया करता था। तभी मेरे मोबाइल पर किसी का कॉल आया ‘प्रीत की लत मुझे ऐसे लागी हो गई मैं दीवानी’ ये मेरा रिंग टोन हुआ करता था। अननोन नंबर से कॉल था…
‘हैलो…’ मैंने कॉल रिसीव करते के साथ कहा।
”हैलो…तुम सनातन बोल रहे हो..?” करीब-करीब डांटते हुए उसने मुझसे पूछा। उसकी आवाज़ बहुत भद्दी थी।
‘हाँ बोल रहा हूँ, बताइए’ मैंने शांत स्वर में कहा।
“अनामिका को जानते हो तुम?” उस दैत्य ने गरजते हुए मुझसे पूछा।
संयोग ऐसा था कि उन दिनों मैं तीन अनामिका को जानता था। एक इस लड़की का नाम अनामिका था, दूसरा एक स्टूडेंट पढ़ने आती थी, उसका नाम था। तीसरा अंसल प्लाज़ा के पास एक लड़की को पढ़ाने जाता था उसका भी नाम अनामिका ही था।
‘हाँ जानता हूँ,’ मैंने फिर सहजता से कहा । मैं अब तक मामले की ग़मभीरता को नहीं समझ पाया था। मैं इस सोच में था कि कोई पेरेंट्स होगा।
“तुम अपना एड्रेस दो, मैं मिलने आता हूँ तुमसे।” अब उसके लहजे से साफ़ पता चल रहा था कि ये कोई नर्मल कॉल नहीं है। लेकिन अभी तक मुझे ये पता नहीं चल पाया था कि के किस अनामिका के बारे में बात कर रहा है और मुझसे क्यूँ मिलना चाहता है।
‘आपको काम क्या है..और आप कौन बोल रहे हैं?’ मेरा लहजा अब भी एक प्रोफेशनल जैसा ही था।
“मैं सुमित बोल रहा हूँ… आज के बाद तुम अनामिका से नहीं मिलोगे..समझ में आई बात, अगर नहीं आई तो एड्रेस दो आकर समझा देता हूँ।” इतनी बदतमीज़ी से आज तक किसी ने मुझ से बात नहीं किया था। मेरे चेहरे का रंग उड़ गया था। लेकिन मैं कोशिश कर रहा था कि सामने बैठे संतोष को ये पता न चले कि फ़ोन पर मेरी क्या बात हो रही है, I mean मैं नहीं चाहता था कि उसे पता चले की मेरी क्या फजीहत हो रही है। थोड़ी देर फोन पर हुज्जत करने के बाद उसने फ़ोन रख दिया। उसने कई बार मुझसे मेरे इंस्टिट्यूट का पता पूछा लेकिन मैंने नहीं दिया।
कॉल कटने के बाद मैं काफी देर तक गुम बैठा रहा। मैंने दिमाग दौड़ाने लगा कि ये सुमित कौन हो सकता है… मेरे एक पुराने माकन मालिक के बेटे का नाम सुमित था। मुझे लगा कहीं वो तो मजाक नहीं कर रहा था, लेकिन उसकी इतनी हिम्मत नहीं कि इस तरह से मुझसे बात करे । ये साफ़ हो गया था कि कोई पेरेंट्स नहीं था। और ये किस अनामिका के बारे में बात कर रहा था ये भी साफ हो गया था। कहीं ये अनामिका का भाई तो नहीं था….. लेकिन वो तो चोमू है…. क्या मेरे इतने बुरे दिन आ गए कि मेरी माशूका का भाई मुझे कॉल कर के धमका रहा है। मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था कि आखिर हुआ क्या है…. इसके भाई को मैंने एक दो बार देखा था। लेकिन वो चोमू सा था। मुझे कभी उससे कोई खतरा महसूस नहीं हुआ था। मुझे ज़रा भी आईडिया नहीं था कि ये क्या हो रहा था….
मैंने झट से अनामिका का नंबर डायल किया। आखरी रिंग पर कॉल रिसीव हुआ… “हेल्लो” ये फिर उसी राक्षस की आवाज़ थी। “कौन बोल रहे हो”… उसने गरज कर पूछा। मेरी सिटी-पिटी गुम हो गई थी। ‘जिनका नंबर है उनसे बात करनी है’ मैंने ऑलमोस्ट घिघियाते हुए कहा। “तुम सनातन बोल रहे हो न?” दानव ने कड़कते हुए पूछा। ‘हाँ….’ मैंने दबी जुबान में कहा | “तुमको मना किया था न बात करने से, आज के बाद कोई कॉल नहीं
आना चाहिए”, कहकर उसने कॉल काट दिया। थैंक गॉड उसने कॉल काट दिया…मैं कॉल काटने की स्थति में भी नहीं था। इतना ज़लील तो मैं अपनी पूरी ज़िन्दगी में नहीं हुआ था । Who the hell was he…!!! मेरा शरीर जल रहा था |
शाम में घर आने के बाद बच्ची ने मुझे मिलने के लिए बुलाया, “आज जो हुआ उसके लिए I am sorry, घर पे आओ तुम से कुछ बात करनी है”| शाम में पता चला ये महानुभाव यानि सुमित बाबु तीन साल से इनकी ज़िन्दगी में हैं। “उसने तीन साल में कभी इस तरह से रियेक्ट नहीं किया था, today he वास almost violent to me. मेरा फ़ोन छीन लिया, सारा मेसेज एंड कॉल रिकॉर्ड चेक किया, उस दिन जब तुम से बात कर रही थी, तो उसका फ़ोन आ रहा था, मैं उसे बोली मैं सिस्टर से बात कर रही थी | लेकिन आज कॉल रिकॉर्ड में तुम्हारा नाम देखकर वो पगला गया…. He says कि मैं कुछ दिनों से बहुत बदल गई हूँ….।
मैं बहुत डर गई हूँ सनातन…, क्या करूं…?” रोनी सूरत बना कर मुझसे बोली….| मैंने उसके ‘क्या करूं’ का कोई जवाब नहीं दिया… बात दरसल ये थी कि उसके साथ-साथ मैं भी डर गया था |
मोटी बात मुझे ये पता चली कि ये दोनों पहले एक ही ऑफिस में काम करते थे । तीन साल से इन दोनों का सीन ऑन था। एक साल से दोनों अलग-अलग ऑफिस में थे… अभी कुछ दिन पहले भाई साहब ने फिर से इसके ऑफिस को ज्वाइन किया था.. पीछे जब ये बिना he और she का use किये अपने जिस फ्रेंड के बारे में मुझे एक दो बार बताई थी, वो यही भाई साहब थे। बताने की ज़रूरत नहीं है कि हम उस घटना के बाद भी रोज़ मिलते रहे। now morally she was with him, and emotionally with me. लेकिन अब में इससे दूर जाना चाहता था…अपने प्यार का गला घोट कर। लेकिन ‘सुन जमाना सुन ये प्यार है प्यार, इतनी आसानी से मरता नहीं है।’ आज तीन महीना बाद हम फिर आमने सामने थे।
अनामिका फिर से बोलना शुरू की ‘ये मेरा पहला डेथ था, I mean, इससे पहले मैंने कभी किसी को मारा हुआ नहीं देखा था अपने क्लोज रिलेशन में’.
मैं फिर से ‘ह्म्म्म…..’ दिमाग में पचास बातें एक साथ घूम रही थी |
“खैर ये सब छोड़ो, तुम बताओ, क्या बात करनी है ?”
‘पहले चाय पी लो, फिर कहता हूँ, चाय वाला आता ही होगा…it’s nothing serious, it’s a non-serious serious issue. Haahah.’ मैंने हँसे की असफल कोशिश की..! – क्या अब भी मुझे इससे अपने दिल की बात बतानी चाहिए..??? मैं कुछ निर्णय नहीं कर पाने की स्थिति में था |
उसने मुझे ज्यादा सोचने का मौका नहीं दिया , “तुम्हारी पहेली मुझे समझ नहीं आती है, वैसे I know कि तुम क्या बात करने वाले हो, वो जो तीन महीने में राख हो चुका था, लगता है फिर से सुलग उठा है”
मैं थोड़ा खुश हुआ, उसके बात करने के अंदाज़ ये नहीं लगा कि ये अपने सास को लेकर दुखी है।
‘कुछ भी राख नहीं हुआ था, तीन महीना से, एक पल के लिए भी बिना बुझे सुलग रहा हूँ |’ मैंने उसी के लहजे में उसे जवाब दिया, उलहाना देते हुए।

मेरी बात सुनके एक दम से गरज उठी, “अगर राख नहीं हुआ था, तो तुमने तीन महीने में एक बार भी पलट कर मेरी खोज-ख़बर क्यों नहीं ली, तुम तो कहते थे मैं तुम्हारी ऑक्सीजन हूँ फिर कैसे रहे इतने दिन तक मेरे बिना… और ये कंप्यूटर का वॉलपेपर क्यों बदला, तुम तो कहते थे कि ये लड़की तुम्हारी तरह दिखती है इसीलिए इसको लगा रक्खा है, फिर हटाया क्यों…? एक बार भी कॉल नहीं किया तुमने…. और उस दिन 31 नवम्बर को, जब ‘what happened’ कर के तुम्हारा मेसेज आया था, कोई पन्द्रह कॉल किया मैंने लेकिन तुमने फ़ोन ऑफ कर लिया……. खैर छोड़ो…. बताओ क्या बात करनी हैं… और do you know.. उस दिन जब तुम ने मोबाइल ऑफ कर लिया मैं तुम्हारे घर पर भी गयी थी, तुमसे मिलने…” | एक सांस में उसने जिताना कुछ उसके अंदर चल रहा था मुझे सुना दिया।

उसकी इस उलटे चोर कोतवाल को डांटे वाली हरकत पर मुझे तेज़ गुस्सा आया- कैसी इडियट लड़की है, she left me, she suddenly started ignoring me, इसने मुझे छोड़ा था, इसको प्रॉब्लम थी, इसने कॉल करना बंद किया था | she lied to me, और अभी सब मेरे पर डाल रही है | I remember जब ये उस दिन मुझे ये बता रही थी कि इसके एक दोस्त ने इसी की ऑफिस को ज्वाइन किया है, तो कैसे ये बात को इस तरह से बोल रही थी कि ये पता न चले कि इसका वो दोस्त लड़का है या लड़की, बिना He या she का यूज़ किए इसने मुझे पूरी कहानी सुना दी थी मुझे| तभी मुझे पता चल गया था कि दाल में कुछ कला है | जब आलरेडी इसकी लाइफ में कोई था, तो इसने मेरे साथ कहानी क्यों शुरू की, सारी गलती इसकी है… और अभी आरोप मुझ पे लगा रही है | और उस रात की बात मुझे बोली की भाभी रूम में इसीलिए बात नहीं कर सकती, जब असलीयत ये था कि उस नमूने का कॉल आ रहा था इसको…!!!! लेकिन ये सब कहने की हिम्मत नहीं थी मेरी….

मैं सफाई देने लगा, “उस दिन मैंने गलती से ‘what happened’ वाला मेसेज भेज दिया था तुम्हे | वो मेसेज किसी और के लिए था….और उस वक़्त मैं कहीं बैठा हुआ था, इसीलिए फ़ोन ऑफ कर दिया, और क्या बोलता कि गलती से तुम्हे sms चला गया था…!! मुझे पता है कि तुम मेरे घर पर आई थी…., जब गेट से बहार खाड़ी हो कर नीचे वाली आंटी से बात कर रही थी, तो मैंने दूर से देखा था | लेकिन मेरी इतनी हिम्मत नहीं थी कि मैं तुम्हे फेस करता…., मैं वहीँ से वापिस लौट गया और फिर एक घंटे बाद वापिस आया | रात भर जलता रहा था मैं…… कितना बेचैन रहा था मैं पूरी रात… and I was angry too… इतना ही प्यार था तो देर रात एक बार कॉल कर लेती…. वैसे भी मेरे मेसेज की वजह से कॉल कर रही थी तुम, न की अपनी मर्ज़ी से..!!
मैंने अपनी बात जारी रखी, ‘तुमको नहीं पता कि इन तीन महीनों में मैंने तुम्हे कितना miss किया है, और what जिंदा हूँ….is this a life ? तुम बोली तुम डर गई हो, और अचानक तुमने झूठ बोल कर कॉल करना बंद कर दिया, मुझे याद है तुम बोली थी, “घर में मेहमान आए हुए हैं, मैं तुम्हे परसों कॉल करती हूँ” उसके बाद तुमने न कॉल किया न मेसेज | और मैं करता भी तो क्या करता, सुमित वाले मामले के बाद तुममें जो बदलाव आया उससे मैं बहुत परेशान रहने लगा था | मुझे लगा तुम मुझ से दूर जाना चाहती हो, उस दिन तुम मुझ से कह रही थी, “मैं अचानक गायब हो जाउंगी तो तुम क्या करोगे,” सो मैंने सोचा शयद तुम जानबूझ कर मुझ से दूर चली गई हो, मैं शिद्दत से तुम्हारा इंतजार कर रहा था, ये सोच कर कि अगर तुम मुझसे प्यार करती हो तो वापिस ज़रूर आओगी | दिन-रात विरह की आग में जलता रहा हूँ, रोज़ तुमको याद करके रोता था | बस नाम के लिए जिंदा हूँ, अगर बुजदिल नहीं होता तो आत्महत्या कर लिया होता… I cannot live without you. |’ बोलते बोलते मेरी आँखे भर आई थी, लेकिन आखरी वाक्य मैंने झूठ बोला था, मरने की बात
मैंने कभी नहीं सोची थी |वैसे मैं इस बात से खुश था कि मेरी आंखे भर आई थी…
“अब मुझसे क्या चाहते हो… What can I do for you?’’
‘कुछ नहीं, but I want you…., I cannot live without you. इन तीन महीने में, तुम्हे पता नहीं मेरी कैसी हालत हो गई है..??’

हौले से मुस्का के कहने लगी, “मैं रोज़ ऑफिस से घर आते टाइम तुम्हारे घर की और देखती थी, सोचती शायद तुम दिख जाओ, पर मुझे नहीं लगता मैं तुम्हे पहचान पाती, तुम बाल कटा कर बिल्कुल अलग दीखते हो… उस दिन जब मैंने तुम्हे देखा तो पहचान ही नहीं पाई….”

‘तुम्हे इतने दिन बाद आने में अजीब नहीं लगा..?’

“नहीं लगा…मैं कब से सोच रही थी, कोई बहाना या मौका नहीं मिल रहा था, उस दिन दिव्य बोली कि मुझे सनातन के यहाँ म्यूजिक सिखने जाना है, आप मेरे साथ चलेंगी, मैंने उसका इंस्टीट्यूट नहीं देखा है, मैं बिना कुछ सोचे झट से आई गई, रस्ते भर तो सब ठीक था, लेकिन गेट पर आ के थोड़ा डरी हुई थी मैं, पता नही तुम कैसे रियेक्ट करोगे….!!!!’’
‘पता है जब दिव्या का कॉल आया था तो मुझे ऐसा लगा था कि तुम उसके साथ आओगी…पता नहीं क्यों मेरे अंदर से ऐसी फीलिंग आ रही थी’
“shut up ….इडियट… आ गई तो तुमको पहले से पता था”, इठला कर बोली |
Now, she was in good mood….

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February 4, 2014

उंगलिया……….कोई बात नहीं जख्म है तो पट्टी करवा लो……..उँगलियों के चक्कर में जीवन को दाव पर नहीं लगाते …….अभी तो तुम्हें बहुत दिन इस नरक में जीना है…….मजा लो यार………

February 4, 2014

एक जगह ऐसा लगा जैसे सनातन को अपनी गर्ल फेंड से ज्यादा प्यार चाय वाले के साथ है…….

February 4, 2014

व्याकरण कि दृष्टि से आलेख में त्रुटियां दिखी जो अक्सर में आलेखों में दिखता है…….जिस पर मुझे बहुत किन्तु तुम्हें कम काम करना है…..

February 4, 2014

आज के जटिल और उलझे हुए युवाओं के व्यक्तित्व को बहुत ही सहज और सरल भाषा में लिखे हो…….एक ऐसी अभिव्यक्ति जो हर किसी समझने कि जरुरत नहीं पड़ेगा……ऐसा लगता है जैसे पूरा का पूरा दृश्य आखों के सामने घटित हो रहा है……….

February 4, 2014

बहुत ही ईमानदारी से लिखे हो ….जो की बहुत कम दिखता है….

February 4, 2014

खुद को स्वीकार करना बहुत बड़ी बात होती है……..वो यहाँ दिखा…….


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